Ashok Chakradhar
तमाशा by Ashok Chakradhar

तमाशा by Ashok Chakradhar

अब मैं आपको कोई कविता नहीं सुनाता एक तमाशा दिखाता हूँ, और आपके सामने एक मजमा लगाता हूँ। ये तमाशा कविता से बहूत दूर है, दिखाऊँ साब, मंजूर है? कविता सुनने वालो ये मत कहना कि कवि ...

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नन्ही सचाई  by Ashok Chakradhar

नन्ही सचाई by Ashok Chakradhar

एक डॉक्टर मित्र हमारेस्वर्ग सिधारे।असमय मर गए,सांत्वना देनेहम उनके घर गए।उनकी नन्ही-सी बिटियाभोली-नादान थी,जीवन-मृत्यु सेअनजान थी।हमेशा की तरहद्वार पर आई,देखकर मुस्कुराई।उसकी ...

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गरीबदास का शून्य by Ashok Chakradhar

गरीबदास का शून्य by Ashok Chakradhar

घास काटकर नहर के पास, कुछ उदास-उदास साचला जा रहा थागरीबदास। कि क्या हुआ अनायास...दिखाई दिए सामनेदो मुस्टंडे,जो अमीरों के लिए शरीफ़ थेपर ग़रीबों के लिए गुंडे। उनके हाथों मेंतेल पिए ...

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कम से कम by Ashok Chakradhar

कम से कम by Ashok Chakradhar

एक घुटे हुए नेता नेछंटे हुए शब्दों मेंभावुक तकरीर दी,भीड़ भावनाओं से चीर दी।फिर मानव कल्याण के लिएदिल खोल दान के लिएअपनी टोपी घुमवाई,पर अफ़सोसकि खाली लौट आई।टोपी को देखकरनेता जी ...

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किधर गई बातें by Ashok Chakradhar

किधर गई बातें by Ashok Chakradhar

चलती रहींचलती रहींचलती रहीं बातेंयहाँ की, वहाँ कीइधर की, उधर कीइसकी, उसकीजने किस-किस की,किएकएकसिर्फ़ उसकी आँखों को देखा मैंनेउसने देखा मेरा देखना ।और... तो फिर...किधर गईं ...

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क्रम by Ashok Chakradhar

क्रम by Ashok Chakradhar

एक अंकुर फूटापेड़ की जड़ के पास ।एक किल्ला फूटाफुनगी पर ।अंकुर बढ़ाजवान हुआ,किल्ला पत्ता बनासूख गया ।गिरा उस अंकुर कीजवानी की गोद मेंगिरने का ग़म गिराबढ़ने के मोद में ।

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कौन है ये जैनी? by Ashok Chakradhar

कौन है ये जैनी? by Ashok Chakradhar

बीवी की नज़र थीबड़ी पैनी-क्यों जी,कौन है ये जैनी?सहज उत्तर था मियाँ का-जैनी,जैनी नाम हैएक कुतिया का।तुम चाहती थीं नएक डौगी हो घर में,इसलिए दोस्तों सेपूछता रहता था अक्सर मैं।पिछले ...

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ठेकेदार भाग लिया by Ashok Chakradhar

ठेकेदार भाग लिया by Ashok Chakradhar

फावड़े नेमिट्टी काटने से इंकार कर दियाऔरबदरपुर पर जा बैठाएक ओरऐसे में तसले की मिट्टी ढोनाकैसे गवारा होता ? काम छोड़ आ गयाफावड़े की बगल में।धुरमुट की क़ंदमताल.....रुक गई,कुदाल के ...

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चेतन जड़ by Ashok Chakradhar

चेतन जड़ by Ashok Chakradhar

प्यास कुछ और बढ़ीऔर बढ़ी ।बेल कुछ और चढ़ीऔर चढ़ी ।प्यास बढ़ती ही गई,बेल चढ़ती ही गई ।कहाँ तक जाओगी बेलरानीपानी ऊपर कहाँ है ?जड़ से आवाज़ आई-यहाँ है, यहाँ है ।

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दया by Ashok Chakradhar

दया by Ashok Chakradhar

भूख में होती है कितनी लाचारी,ये दिखाने के लिए एक भिखारी,लॉन की घास खाने लगा,घर की मालकिन में दया जगाने लगा।दया सचमुच जागीमालकिन आई भागी-भागी-क्या करते हो भैया ?भिखारी बोलाभूख लगी ...

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कितनी रोटी by Ashok Chakradhar

कितनी रोटी by Ashok Chakradhar

गांव में अकाल था,बुरा हाल था।एक बुढ़ऊ ने समय बिताने को,यों ही पूछा मन बहलाने को—ख़ाली पेट परकितनी रोटी खा सकते होगंगानाथ ?गंगानाथ बोला—सात !बुढ़ऊ बोला—गलत !बिलकुल ग़लत कहा,पहली ...

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फिर कभी by Ashok Chakradhar

फिर कभी by Ashok Chakradhar

एक गुमसुम मैना हैअकेले में गाती हैराग बागेश्री ।तोता उससे कहेकुछ सुनाओ तो ज़रातोचोंच चढ़ाकर कहती हैफिर कभी गाऊँगी जी ।

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चल दी जी, चल दी by Ashok Chakradhar

चल दी जी, चल दी by Ashok Chakradhar

मैंने कहाचलोउसने कहानामैंने कहातुम्हारे लिए खरीदभर बाज़ार हैउसने कहाबन्दमैंने पूछाक्योंउसने कहामनमैंने कहान लगने की क्या बात हैउअसने कहाबातें करेंगे यहींमैंने कहानहीं, चलो ...

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पोल-खोलक यंत्र by Ashok Chakradhar

पोल-खोलक यंत्र by Ashok Chakradhar

ठोकर खाकर हमनेजैसे ही यंत्र को उठाया,मस्तक में शूं-शूं की ध्वनि हुईकुछ घरघराया।झटके से गरदन घुमाई,पत्नी को देखाअब यंत्र सेपत्नी की आवाज़ आई-मैं तो भर पाई!सड़क पर चलने तक कातरीक़ा ...

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पहले पहले by Ashok Chakradhar

पहले पहले by Ashok Chakradhar

मुझे याद हैवहजज़्बाती शुरुआत कीपहली मुलाक़ातजब सोते हुए उसके बालअंगुल भर दूर थेलेकिन उन दिनों मेरे हाथकितने मज़बूर थे ?

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नख़रेदार by Ashok Chakradhar

नख़रेदार by Ashok Chakradhar

भूख लगी हैचलो, कहीं कुछ खाएं ।देखता रहा उसकोखाते हुए लगती है कैसी,देखती रही मुझकोखाते हुए लगता हूँ कैसा ।नख़रेदार पानी पियानख़रेदार सिगरेटढाई घंटे बैठ वहाँबाहर निकल आए ।

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गति का कुसूर by Ashok Chakradhar

गति का कुसूर by Ashok Chakradhar

क्या होता है कार में-पास की चीज़ें पीछे दौड़ जाती हैतेज़ रफ़तार में!और ये शायदगति का ही कुसूर हैकि वही चीज़देर तक साथ रहती हैजो जितनी दूर है।

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जंगल गाथा by Ashok Chakradhar

जंगल गाथा by Ashok Chakradhar

पानी से निकलकरमगरमच्छ किनारे पर आया,इशारे सेबंदर को बुलाया.बंदर गुर्राया-खों खों, क्यों,तुम्हारी नजर में तोमेरा कलेजा है?मगर्मच्छ बोला-नहीं नहीं, तुम्हारी भाभी नेखास तुम्हारे ...

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बौड़म जी बस में by Ashok Chakradhar

बौड़म जी बस में by Ashok Chakradhar

बस में थी भीड़और धक्के ही धक्के,यात्री थे अनुभवी,और पक्के ।पर अपने बौड़म जी तोअंग्रेज़ी मेंसफ़र कर रहे थे,धक्कों में विचर रहे थे ।भीड़ कभी आगे ठेले,कभी पीछे धकेले ।इस रेलमपेलऔर ...

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माशो की माँ  by Ashok Chakradhar

माशो की माँ by Ashok Chakradhar

नुक्कड़ पर माशो की माँबेचती है टमाटर ।चेहरे पर जितनी झुर्रियाँ हैंझल्ली में उतने ही टमाटर हैं ।टमाटर नहीं हैंवो सेव हैं,सेव भी नहींहीरे-मोती हैं ।फटी मैली धोती सेएक-एक पोंछती है ...

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सो तो है खचेरा by Ashok Chakradhar

सो तो है खचेरा by Ashok Chakradhar

गरीबी है- सो तो है,भुखमरी है - सो तो है,होतीलाल की हालत खस्ता है - सो तो खस्ता है,उनके पास कोई रस्ता नहीं है - सो तो है।पांय लागूं, पांय लागूंबौहरे आप धन्न हैं,आपका ही खाता हूं ...

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देह नृत्यशाला by Ashok Chakradhar

देह नृत्यशाला by Ashok Chakradhar

अँधेरे उस पेड़ के सहारेमेरा हाथपेड़ की छाल के अन्दरऊपर की ओरकोमल तव्चा परथरथराते हुए रेंगाऔर जा पहुँचा वहाँजहाँ एक शाख निकली थी ।काँप गई पत्तियाँकाँप गई टहनीकाँप गया पूरा पेड़ ...

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चुटपुटकुले  by Ashok Chakradhar

चुटपुटकुले by Ashok Chakradhar

चुटपुटकुले ये चुटपुटकुले हैं, हंसी के बुलबुले हैं। जीवन के सब रहस्य इनसे ही तो खुले हैं, बड़े चुलबुले हैं, ये चुटपुटकुले हैं। माना कि कम उम्र होते हंसी के बुलबुले हैं, पर जीवन के ...

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तेरा है by Ashok Chakradhar

तेरा है by Ashok Chakradhar

तू गर दरिन्दा है तो ये मसान तेरा है,अगर परिन्दा है तो आसमान तेरा है।तबाहियां तो किसी और की तलाश में थींकहां पता था उन्हें ये मकान तेरा है।छलकने मत दे अभी अपने सब्र का प्याला,ये ...

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सुविचार by Ashok Chakradhar

सुविचार by Ashok Chakradhar

मन में इसी सुविचार का सुविचार होसन चार में बस प्यार का संचार हो जनतंत्र के जज़्बात को जीमें नहींजोगी की या जुदेव की नाराज़गियाँनभ में कबूतर तो दिलेरी से उड़ेंना हो दलेरों की कबूतर ...

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