User Posts: dineshguptadin
मेरी चुनिंदा देशभक्ति शायरी

मेरी चुनिंदा देशभक्ति शायरी

लिख रहा हूँ मैं जिसका अंजाम आज, कल उसका आगाज़ आएगा मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा मैं रहूँ ना रहूँ ये वादा है तुझसे मेरा मरे बाद वतन पे मिटने वालों का सैलाब आएगा | बंद ...

0
अबकी दिवाली एक ऐसा दीया जलायें

अबकी दिवाली एक ऐसा दीया जलायें

#दिवाली कविता "अबकी दिवाली एक ऐसा दीया जलायें " सत्ता बाहर निकले वोटो के फेरों से जनता बाहर निकले बाबाओं के डेरों से खोल के घर का रोशनदान नए ख्वाब झाकेँ छत की ...

1
आजादी के ७० साल ….

आजादी के ७० साल ….

15, August 1947- 15, August 2017 विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने का गर्व हमारे चेहरों पर हर 15 August को निखर उठता है, हाँ वो और बात है कि सही मायनों मे न तो कभी हम ...

1
जब से मेरी इन आँखों पर तेरी जुल्फों का साया हो गया है

जब से मेरी इन आँखों पर तेरी जुल्फों का साया हो गया है

  जब से मेरी इन आँखों पर तेरी जुल्फों का साया हो गया है प्यार-इश्क-मुहब्बत में कितना वक्त जाया हो गया है   एक सख्श आज भी दिल के उतना ही करीब है बेशक ज़माने ...

6
हमारी लाड़ली लाई बहार

हमारी लाड़ली लाई बहार

खिल उठी कलियाँ, चहक उठा आँगन रोशन हुई गलियाँ, महक उठा गुलशन रोम रोम गदगद हुआ, आनंदित हुआ तन मन मौसम में छाई बहार, चली कुछ ऐसी बयार रब ने हमारी सुन ली ...

1
इश्क में अक्सर कितने अहसान रह जाते हैं  ( गजल )

इश्क में अक्सर कितने अहसान रह जाते हैं ( गजल )

    जख़्म भर जाते हैं चोट के निशान रह जाते हैं इश्क में अक्सर कितने अहसान रह जाते हैं   बेशक जान लेता है सारा जमाना इश्क में मगर अक्सर हम खुद से ही अनजान रह ...

1
हम जो होठों पर इतनी मुस्कान लिए बैठे हैं (गजल)

हम जो होठों पर इतनी मुस्कान लिए बैठे हैं (गजल)

हम जो होठों पर इतनी मुस्कान लिए बैठे हैं सीने में ग़मों का तूफान लिए बैठे हैं   आप जो हमसे इतना अनजान हुए बैठे हैं आप तो हमारी जान ही लिए बैठे हैं   ...

1
क्यों लिखता है श्रृंगार  का ये कवि शब्दों से अंगार

क्यों लिखता है श्रृंगार का ये कवि शब्दों से अंगार

जब शीश कटता है सीमा पर मेरे देश के जवान का लहू उबलता है जब पूरे हिंदुस्तान का…………….. मेरी भी रगों का तब खून खोलता है………………. कतरा कतरा मेरे जिस्म का तब शब्द बनकर बोलता है… जब ...

1
मेरी आँखों में मुहब्बत के मंज़र है (शायरी)

मेरी आँखों में मुहब्बत के मंज़र है (शायरी)

मेरी आँखों में मुहब्बत के जो मंज़र है तुम्हारी ही चाहतों के समंदर है में हर रोज चाहता हूँ कि तुझसे ये कह दूँ मगर लबो तक नहीं आता, जो मेरे दिल के अन्दर है   ...

1
ज़िन्दगी क्या होती हे ( समाज में फैली विषमतायें आज भी हृदय को झकझोर देती है )

ज़िन्दगी क्या होती हे ( समाज में फैली विषमतायें आज भी हृदय को झकझोर देती है )

सबकी राहों मे नहीं होती है चादर फूलों की किसी की तक़दीर होती है डगर शुलों की ज़िन्दगी क्या होती है जरा उनसे पुछो जिनके घर रोज जंग होती है भूख और उसूलों की सबको नहीं मिलता जीवन ...

1
कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ मै

कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ मै

शब्द नए चुनकर गीत वही हर बार लिखूँ मैं उन दो आँखों में अपना सारा संसार लिखूँ मैं विरह की वेदना लिखूँ या मिलन की झंकार लिखूँ मैं कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ ...

1
दीया अंतिम आस का ( एक सिपाही की शहादत के अंतिम क्षण )

दीया अंतिम आस का ( एक सिपाही की शहादत के अंतिम क्षण )

दीया अंतिम आस का, प्याला अंतिम प्यास का वक्त नहीं अब, हास परिहास उपहास का कदम बढाकर मंजिल छु लुं, हाथ उठाकर आसमाँ पहर अंतिम रात का, इंतज़ार प्रभात का   बस एक बार उठ ...

0
इश्क में अक्सर कितने अहसान रह जाते हैं

इश्क में अक्सर कितने अहसान रह जाते हैं

जख़्म भर जाते हैं चोट के निशान रह जाते हैं इश्क में अक्सर कितने अहसान रह जाते हैं बेशक जान लेता है सारा जमाना इश्क में मगर अक्सर हम खुद से ही अनजान रह जाते हैं खामोश रहते हैं होंठ, ...

5
हम जो होठों पर इतनी मुस्कान लिए बैठे हैं

हम जो होठों पर इतनी मुस्कान लिए बैठे हैं

हम जो होठों पर इतनी मुस्कान लिए बैठे हैं सीने में ग़मों का तूफान लिए बैठे हैं आप जो हमसे इतना अनजान हुए बैठे हैं आप तो हमारी जान ही लिए बैठे हैं एक वो हैं जो इश्क करके कब का मुकर ...

5
जो कुछ भी था दरमियाँ

जो कुछ भी था दरमियाँ

जो कुछ भी था दरमियाँतेरे सुर्ख होंठो की नरमियाँ याद हैतेरी सर्द आहों की गरमियाँ याद हैकुछ भी तो नहीं भूले हम आज भीजो कुछ भी था दरमियाँ याद है....याद है बिन तेरे वो शहर का ...

1
मेरी आँखों में मुहब्बत के मंज़र है (शायरी)

मेरी आँखों में मुहब्बत के मंज़र है (शायरी)

मेरी आँखों में मुहब्बत के जो मंज़र है तुम्हारी ही चाहतों के समंदर है में हर रोज चाहता हूँ कि तुझसे ये कह दूँ मगर लबो तक नहीं आता, जो मेरे दिल के अन्दर है मेरे दिल में तस्वीर हे ...

7
ज़िन्दगी क्या होती है

ज़िन्दगी क्या होती है

सबकी राहों मे नहीं होती है चादर फूलों की किसी की तक़दीर होती है डगर शुलों की ज़िन्दगी क्या होती है जरा उनसे पुछो जिनके घर रोज जंग होती है भूख और उसूलों की सबको नहीं मिलता जीवन मे ...

7
दीया अंतिम आस का [एक सिपाही की शहादत के अंतिम क्षण ]

दीया अंतिम आस का [एक सिपाही की शहादत के अंतिम क्षण ]

दीया अंतिम आस का, प्याला अंतिम प्यास का वक्त नहीं अब, हास-परिहास-उपहास का कदम बढाकर मंजिल छू लूँ, हाथ उठाकर आसमाँ पहर अंतिम रात का, इंतज़ार प्रभात का बस एक बार उठ जाऊँ, उठकर ...

4
Editor choice कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ मैं

कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ मैं

शब्द नए चुनकर गीत वही हर बार लिखूँ मैं उन दो आँखों में अपना सारा संसार लिखूँ मैं विरह की वेदना लिखूँ या मिलन की झंकार लिखूँ मैं कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ ...

6
Browsing All Comments By: dineshguptadin
Best Selling BooksGrab Now!
+ +