वो लम्हो का जिक्र…..

Deal Score+43

उस मोड़ पर तलाश करते है हम तुम्हारा,
जिस मोड़ पर हम रोज़ मिला करते थे।
वो पल भी क्या हसीन थे,
जब वहाँ खड़े खड़े आँखो से बाते किया करते थे।।
दिन का सुरज चमकता था तेज ,
जब हम तुम साथ हुआ करते थे ।
रात की चाँदनी निखर के उभरती थी,
जिस रात उस मोड़ किनारे हम मिला करते थे।।
न तू रह सकती थी मेरे बिना न मेरा गुजारा होता था तेरे बिना
लेकिन वक्त के पहिये की रफ्तार तेज होने के कारण
न वो दिन रहे न वो रातें,
बस तेरी याद मे काटता हूँ दिन पलपल।
तेरे अलावा न कोई सहारा मिला मुझे,
बस तेरी याद को ही साथी बना जिता हूँ आजकल ।।

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